देव चन्द्र: मन के अधिष्ठाता सोम, दक्ष-शाप और सोमनाथ की कथा

Chandra · The mind (manas), tides, the 27 Nakshatra wives

मन जिनसे जन्मा माना जाता है, औषधियाँ जिनसे रस पाती हैं, और ज्वार जिनके इशारे पर उठते हैं। घटने-बढ़ने के शाप को जिन्होंने शिव-शरण से जीवन-लय बना लिया — वह घटता-बढ़ता, फिर भी अमर मानी जाने वाली देवता।

श्रेणी: ग्रह देवता परंपरा: Pan-Hindu ID: D044

परिचय एवं उपासना का महत्व

Why worship Chandra · Introduction and divine form

चन्द्र को नवग्रह-मंडल में द्वितीय स्थान प्राप्त है, और उन्हें मन अर्थात मनस् का अधिष्ठाता देवता माना जाता है — इसी कारण मान्यता है कि किसी व्यक्ति की कुंडली में चन्द्रमा की स्थिति उसके मानसिक स्वभाव को प्रभावित करती है। इन्हें सोम भी कहा जाता है, और औषधियों का राजा भी माना जाता है, क्योंकि परंपरा में यह विश्वास है कि चन्द्रमा की किरणें वनस्पतियों में विशेष रस और शक्ति भरती हैं।

चन्द्रमा को मृग-रथ पर सवार श्वेत वर्ण के देवता के रूप में वर्णित किया जाता है। सोमवार को उनका विशेष दिन माना जाता है, और उनकी सोलह कलाओं का उल्लेख ज्योतिष-परंपरा में मिलता है, जो अमावस्या से पूर्णिमा तक घटती-बढ़ती चन्द्र-रेखाओं का प्रतीक मानी जाती हैं।

परिवार एवं संबंध

Family and relations

चन्द्रमा का विवाह प्रजापति दक्ष की सत्ताईस पुत्रियों से हुआ बताया जाता है, जिन्हें सत्ताईस नक्षत्रों के रूप में जाना जाता है। इन सत्ताईस पत्नियों में से रोहिणी को चन्द्रमा की सबसे प्रिय पत्नी माना जाता है। बुध को चन्द्रमा का पुत्र माना जाता है, जिनकी उत्पत्ति की कथा भी पुराणों में वर्णित है।

पृष्ठभूमि एवं क्षय की कथा

Background — twenty-seven marriages, one true affection · The wasting — when the moon began to fade and the earth to dry

पुराणों के अनुसार जब दक्ष ने अपनी सत्ताईस पुत्रियों का विवाह चन्द्रमा से किया, तो उन्होंने चन्द्रमा से यह अपेक्षा रखी कि वे सभी पत्नियों के साथ समान व्यवहार करेंगे। किंतु मान्यता है कि चन्द्रमा का सर्वाधिक स्नेह रोहिणी के प्रति था, जिसके कारण शेष छब्बीस पत्नियाँ स्वयं को उपेक्षित अनुभव करने लगीं और इस असंतोष को लेकर वे अपने पिता दक्ष के पास पहुँचीं।

अपनी पुत्रियों की व्यथा सुनकर दक्ष ने क्रोधित होकर चन्द्रमा को यह शाप दिया कि उनकी कलाएँ निरंतर क्षीण होती जाएँगी, ऐसी मान्यता है। इस शाप के प्रभाव से चन्द्रमा का तेज घटने लगा, जिसके कारण पृथ्वी पर औषधियाँ मुरझाने लगीं और सृष्टि में असंतुलन उत्पन्न होने लगा। संकट की इस घड़ी में देवताओं ने शिव से सहायता माँगी, क्योंकि केवल वे ही इस शाप के प्रभाव को नियंत्रित कर सकते थे, ऐसी मान्यता है।

गणेश-दृष्टि और तारा-प्रकरण — सौंदर्य के दो स्खलन

The Ganesha glance and the Tara episode — two falls from grace

एक अन्य प्रसिद्ध कथा में चन्द्रमा द्वारा गणेश के स्वरूप का उपहास किए जाने पर गणेश ने उन्हें यह शाप दिया कि जो कोई भी संकष्टी चतुर्थी के दिन उनका दर्शन करेगा, उसे मिथ्या दोष का सामना करना पड़ेगा — यही कारण बताया जाता है कि इस तिथि पर चन्द्र-दर्शन वर्जित माना जाता है। एक अन्य पौराणिक प्रसंग में चन्द्रमा द्वारा बृहस्पति की पत्नी तारा के अपहरण की कथा भी मिलती है, जिससे बुध के जन्म की कथा जुड़ी बताई जाती है — यह प्रसंग सौंदर्य और मोह के दुरुपयोग की चेतावनी के रूप में देखा जाता है।

कला-दर्शन एवं आध्यात्मिक अर्थ

The waxing and waning — a philosophy of cycles · Spiritual meaning — the phases of the mind

अंततः मान्यता है कि शिव ने चन्द्रमा को अपनी जटाओं में स्थान देकर उसके शाप को पूर्णतः समाप्त करने के स्थान पर उसे एक चक्रीय-लय में परिवर्तित कर दिया — इसी कारण चन्द्रमा अब कृष्ण पक्ष में घटते और शुक्ल पक्ष में बढ़ते हैं, किंतु पूर्णतः लुप्त नहीं होते। सोमनाथ नामक प्रथम ज्योतिर्लिंग की स्थापना इसी कृतज्ञता में चन्द्रमा द्वारा की गई बताई जाती है, जो आज भी गुजरात में एक अत्यंत पूजनीय तीर्थ माना जाता है।

चन्द्रमा की घटती-बढ़ती कलाओं को मन की चंचलता का प्रतीक माना जाता है — जिस प्रकार चन्द्रमा कभी पूर्ण तो कभी क्षीण दिखाई देता है, उसी प्रकार मनुष्य का मन भी कभी स्थिर तो कभी अस्थिर रहता है। यह कथा यह भी सिखाती है कि पक्षपात और अहंकार अंततः कठिनाई ही लाते हैं, किंतु शरणागति और सहनशीलता से किसी भी संकट का सामना संतुलन के साथ किया जा सकता है।

नाम, अर्थ एवं मंत्र

Names and meaning · Mantras and prayers

चन्द्र नाम का अर्थ है शीतल और चमकीला। सोम नाम का संबंध एक दिव्य औषधि-रस से भी जोड़ा जाता है, जिसे यज्ञों में प्रयुक्त किया जाता था। नक्षत्रेश नाम उनके सत्ताईस नक्षत्र-पत्नियों के स्वामी होने से जुड़ा है, और औषधीश नाम औषधियों के अधिपति होने का सूचक माना जाता है।

चन्द्र-ग्रह से संबंधित वैदिक और पौराणिक मंत्रों का पाठ सोमवार के दिन विशेष रूप से किया जाता है। सोमनाथ ज्योतिर्लिंग में शिव-आराधना के साथ-साथ चन्द्रमा की कृतज्ञता-कथा का भी स्मरण किया जाता है। ज्योतिष-परंपरा में चन्द्र-शांति हेतु विशेष मंत्र-जप और स्तोत्र-पाठ की परंपरा भी प्रचलित है।

पर्व एवं व्रत

Festivals and observances

करवा चौथ के अवसर पर विवाहित स्त्रियाँ चन्द्रमा के उदय की प्रतीक्षा कर उनके दर्शन के पश्चात ही व्रत का पारण करती हैं। शरद पूर्णिमा को कोजागरी पर्व के रूप में मनाया जाता है, जब चन्द्रमा को अपनी सोलहों कलाओं से पूर्ण माना जाता है। करवा चौथ जैसे निर्जला व्रत में बीमार, गर्भवती, वृद्ध, मधुमेह-रोगी अथवा किसी औषधि पर निर्भर व्यक्तियों को उपवास से पहले चिकित्सक की सलाह अवश्य लेनी चाहिए।

मंदिर एवं तीर्थ

Temples and pilgrimage sites

गुजरात में स्थित सोमनाथ मंदिर प्रथम ज्योतिर्लिंग माना जाता है, और इसकी स्थापना-कथा चन्द्रमा से सीधे जुड़ी बताई जाती है। यद्यपि चन्द्रमा को समर्पित स्वतंत्र मंदिर अपेक्षाकृत कम मिलते हैं, नवग्रह-मंदिरों में चन्द्र-प्रतिमा को विशेष स्थान अवश्य दिया जाता है।

बच्चों के लिए ज्ञान एवं संबंधित देवता

For young readers · Related deities

चन्द्रमा को बच्चों के लिए यह सरलता से समझाया जा सकता है कि रात के आकाश में दिखने वाला चमकीला चाँद कभी छोटा तो कभी बड़ा क्यों दिखाई देता है — पुराने समय में इसे चन्द्र देवता की कलाओं का घटना-बढ़ना माना जाता था। यह कथा बच्चों को यह भी सिखाती है कि किसी के साथ पक्षपात करना ठीक नहीं होता, और हर किसी के प्रति समान स्नेह रखना चाहिए।

चन्द्रमा का संबंध शिव, गणेश, बृहस्पति और बुध से पुराणों की विभिन्न कथाओं में जुड़ता है। नवग्रह-मंडल में उन्हें द्वितीय स्थान प्राप्त है, जिसके कारण अन्य ग्रह-देवताओं के साथ भी उनका उल्लेख साथ-साथ मिलता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

FAQ

चन्द्रमा को दक्ष का शाप क्यों मिला?
मान्यता है कि चन्द्रमा अपनी सत्ताईस पत्नियों में से रोहिणी के प्रति विशेष स्नेह रखते थे, जिससे शेष पत्नियों के असंतोष पर दक्ष ने उन्हें क्षीण होते जाने का शाप दिया।

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की स्थापना किसने की?
मान्यता है कि चन्द्रमा ने शिव की कृपा से अपने शाप से मुक्ति पाने के पश्चात कृतज्ञतावश सोमनाथ नामक प्रथम ज्योतिर्लिंग की स्थापना की।

चन्द्रमा की सत्ताईस पत्नियाँ कौन मानी जाती हैं?
चन्द्रमा की सत्ताईस पत्नियाँ प्रजापति दक्ष की पुत्रियाँ मानी जाती हैं, जिन्हें सत्ताईस नक्षत्रों के रूप में जाना जाता है।

संकष्टी चतुर्थी के दिन चन्द्र-दर्शन क्यों वर्जित माना जाता है?
मान्यता है कि चन्द्रमा द्वारा गणेश के स्वरूप का उपहास किए जाने पर गणेश ने यह शाप दिया कि इस दिन चन्द्र-दर्शन करने वाले को मिथ्या दोष का सामना करना पड़ेगा।

करवा चौथ का चन्द्रमा से क्या संबंध है?
करवा चौथ के व्रत में विवाहित स्त्रियाँ चन्द्रमा के उदय की प्रतीक्षा करती हैं और उनके दर्शन के पश्चात ही अपना निर्जला व्रत पूर्ण करती हैं।

चन्द्रमा नवग्रह में किस स्थान पर हैं?
चन्द्रमा को नवग्रह-मंडल में द्वितीय स्थान प्राप्त है, और उन्हें मन अर्थात मनस् का अधिष्ठाता देवता माना जाता है।