तुलसी विवाह पूजा विधि: घर पर चरण-दर-चरण
इस लेख में आप घर पर तुलसी विवाह की पूरी विधि क्रम से पढ़ेंगे।
तैयारी से लेकर आरती तक, और साथ में क्या करें व क्या न करें, यह भी।
तुलसी विवाह क्या है और कब किया जाता है
तुलसी को घर में देवी का रूप माना जाता है। तुलसी विवाह में उनका प्रतीकात्मक विवाह भगवान विष्णु के शालिग्राम रूप से किया जाता है। यह कार्तिक मास का पर्व है।
माना जाता है कि देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु योग-निद्रा से जागते हैं। इसके बाद शुभ कार्य शुरू होते हैं। कई परिवार एकादशी को और कई द्वादशी को तुलसी विवाह करते हैं। यह क्षेत्र और कुल-परंपरा पर निर्भर है।
तिथि और शुभ समय पंचांग से तय होते हैं। वे स्थान के अनुसार बदल सकते हैं। इसलिए तारीख पक्की करने से पहले अपने पंचांग या पंडित जी से पूछ लें। पर्व कैलेंडर में भी तिथि देखी जा सकती है।
एक बात पहले ही समझ लें। विधि में क्षेत्र, संप्रदाय और परिवार के अनुसार अंतर होता है। यहाँ सामान्य परंपरा बताई गई है। आपके कुल-पुरोहित की परंपरा इससे ऊपर मानी जाए।
पूजा से पहले की तैयारी
तैयारी एक दिन पहले शुरू कर लें। जल्दबाज़ी में पूजा के बीच सामान ढूँढना पड़ता है, और ध्यान टूट जाता है।
- तुलसी के गमले के आसपास की जगह साफ़ करें। गमले को गेरू या पीली मिट्टी से लीपने की परंपरा है। यह न हो सके तो साफ़ पोंछ लें।
- गमले के चारों ओर गन्ने के चार डंठल खड़े करके मंडप बनाएँ। ऊपर से कपड़ा या फूलों की माला बाँध दें।
- शालिग्राम जी न हों तो भगवान विष्णु की छोटी मूर्ति या चित्र रखें। यह भी परंपरा में स्वीकार किया जाता है।
- तुलसी जी को लाल चुनरी और श्रृंगार की वस्तुएँ चढ़ाने के लिए अलग रखें।
- अपनी पूजा सामग्री की सूची पहले से बना लें। हमारी सामग्री सूची में अवसर के अनुसार वस्तुएँ देखी जा सकती हैं। उसमें हिंदी और English दोनों नाम हैं, और सूची छापी भी जा सकती है।
सामग्री की सूची
नीचे की सारणी में वस्तु और उसका उपयोग लिखा है। अपने घर की परंपरा के हिसाब से इसमें घटा-बढ़ा सकते हैं।
| वस्तु | किसलिए |
|---|---|
| गन्ना | मंडप बनाने के लिए |
| लाल चुनरी, श्रृंगार का सामान | तुलसी जी को वधू रूप में सजाने के लिए |
| पीला वस्त्र या पीताम्बर | शालिग्राम या विष्णु जी के लिए |
| कलश, आम के पत्ते, नारियल | कलश-स्थापना के लिए |
| दीपक, घी, धूप | पूजन और आरती के लिए |
| रोली, चावल, हल्दी | तिलक और अक्षत के लिए |
| फूल और माला | सजावट और अर्पण के लिए |
| फल, मिठाई, पंचामृत | भोग और प्रसाद के लिए |
| मौसमी फल, जैसे सिंघाड़ा | भोग में रखने के लिए |
तुलसी विवाह की विधि, चरण-दर-चरण
पूजा शाम को, गोधूलि के समय करने की परंपरा अधिक प्रचलित है। फिर भी समय अपने पंडित जी या परिवार की रीति के अनुसार रखें।
- स्नान और शुद्धता: स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें। जो व्रत रखते हैं, वे दिन भर फलाहार रखते हैं।
- संकल्प: हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर मन में कहें कि आप तुलसी विवाह का पूजन कर रहे हैं। संकल्प का अर्थ है पूजा का उद्देश्य तय करना।
- गणेश पूजन: हर पूजा की तरह पहले गणेश जी को याद करें। फिर कलश की स्थापना करें।
- तुलसी जी का पूजन: गमले पर रोली और हल्दी से तिलक करें। चुनरी ओढ़ाएँ। श्रृंगार की वस्तुएँ अर्पित करें। दीपक जलाएँ।
- शालिग्राम जी का पूजन: उन्हें साफ़ जल या पंचामृत से स्नान कराएँ। फिर पीला वस्त्र, चंदन और फूल अर्पित करें।
- विवाह-क्रम: शालिग्राम जी को हाथ में लेकर तुलसी जी की सात परिक्रमा कराने की परंपरा है। कई घरों में दोनों को माला पहनाकर और गाँठ बाँधकर विवाह की रस्म निभाई जाती है। यहाँ घर की रीति के अनुसार चलें।
- मंगल गान: विवाह के गीत गाए जाते हैं। परिवार के सब लोग साथ बैठें तो अच्छा है।
- आरती: दीपक से तुलसी जी और विष्णु जी की आरती करें। आरती के बाद सब पर जल छिड़कें।
- भोग और प्रसाद: फल, मिठाई और पंचामृत का भोग लगाकर सबको बाँटें।
मंत्र कौन-से बोलें
लंबे मंत्र याद न हों तो घबराइए नहीं। छोटा नाम-स्मरण भी परंपरा में पर्याप्त माना जाता है। शुद्ध उच्चारण और श्रद्धा ज़्यादा ज़रूरी हैं।
- तुलसी जी के लिए: ॐ तुलस्यै नमः
- भगवान विष्णु के लिए: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
इन्हें पूजन करते समय, परिक्रमा के बीच और आरती से पहले दोहरा सकते हैं। विस्तृत वैदिक विधि चाहिए तो पंडित जी से कराना उचित है।
क्या करें और क्या न करें
| क्या करें | क्या न करें |
|---|---|
| पूजा से पहले जगह और गमला साफ़ करें। | गंदे हाथों या बिना स्नान के तुलसी को न छुएँ। |
| तुलसी के पत्ते पहले से तोड़कर रख लें। | पूजा के बीच में पत्ते तोड़ने न दौड़ें। माना जाता है कि एकादशी, रविवार और संध्या के बाद पत्ते नहीं तोड़े जाते। |
| शालिग्राम जी को साफ़ और ऊँचे स्थान पर रखें। | उन्हें ज़मीन पर या अशुद्ध स्थान पर न रखें। |
| पूरे परिवार को साथ बैठाएँ और बच्चों को अर्थ समझाएँ। | पूजा को केवल सजावट या फोटो तक सीमित न रखें। |
| घर की परंपरा और कुल-पुरोहित की सलाह मानें। | इंटरनेट की किसी एक विधि को ही अंतिम न मान लें। |
तुलसी विवाह में तुलसी के पत्ते भोग में रखे जाते हैं। इसलिए पूजा से पहले ही तय कर लें कि कितने पत्ते चाहिए। पौधे को नुकसान न पहुँचे, इसका ध्यान रखें।
पूजा के बाद क्या करें
आरती के बाद प्रसाद पहले परिवार में और फिर पड़ोस में बाँटें। तुलसी के पास रखा दीपक अपने आप शांत होने दें। बुझाने के लिए फूँक न मारें।
मंडप और फूल अगले दिन सम्मान से हटाएँ। फूलों को बहते जल में या पौधों की मिट्टी में डाला जा सकता है। उन्हें कूड़े में न फेंकें।
अगर घर पर पूरा आयोजन संभव न हो, तो पंडित जी की व्यवस्था की जानकारी ली जा सकती है। बड़े अनुष्ठान के लिए यह परंपरा में भी उचित माना गया है।
मुख्य बातें
- तुलसी विवाह कार्तिक मास का पर्व है, जिसमें तुलसी जी का विवाह शालिग्राम या विष्णु जी से कराया जाता है।
- तिथि और शुभ समय पंचांग या पंडित जी से पूछकर तय करें, क्योंकि वे स्थान के अनुसार बदल सकते हैं।
- क्रम याद रखें: तैयारी, संकल्प, गणेश पूजन, तुलसी और शालिग्राम पूजन, विवाह-क्रम, आरती, प्रसाद।
- छोटे मंत्र श्रद्धा से बोलना लंबे मंत्र अधूरे बोलने से बेहतर है।
- अपने कुल की परंपरा को सबसे ऊपर रखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या तुलसी विवाह घर पर अकेले किया जा सकता है?
हाँ। सामान्य परंपरा के अनुसार घर का कोई भी सदस्य संकल्प लेकर पूजन कर सकता है। परिवार के साथ करना अच्छा माना जाता है। बड़े अनुष्ठान में पंडित जी बुलाने की परंपरा है।
शालिग्राम जी न हों तो क्या करें?
भगवान विष्णु की छोटी मूर्ति या चित्र रखकर पूजन किया जा सकता है। परंपरा इसे स्वीकार करती है। अपने कुल-पुरोहित से भी पूछ लें।
तुलसी विवाह की तिथि कैसे जानें?
तिथि और मुहूर्त पंचांग से तय होते हैं और स्थान के अनुसार बदल सकते हैं। पर्वों की तिथियाँ पर्व कैलेंडर में देखें। निश्चित मुहूर्त के लिए अपने पंडित जी से पूछना उचित है।
क्या हर घर में विधि एक जैसी होती है?
नहीं। क्षेत्र, संप्रदाय और कुल-परंपरा के अनुसार विधि, मंत्र और सामग्री में अंतर होता है। यहाँ सामान्य परंपरा दी गई है। अपने परिवार की रीति को प्राथमिकता दें।
पूजा की सामग्री की सूची कहाँ मिलेगी?
हमारी पूजा सामग्री सूची में अवसर के अनुसार वस्तुएँ देखी जा सकती हैं। वहाँ अपनी सूची तैयार करके छापी भी जा सकती है।
आगे क्या करें। अपनी जगह के अनुसार समय देखने के लिए नीचे का पेज खोलें।
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