5 नवंबर 2026 का पंचांग: गुरुवार के शुभ मुहूर्त, चौघड़िया, तिथि और नक्षत्र
इस लेख में 5 नवंबर 2026 के लिए नई दिल्ली का दैनिक पंचांग, इसके पाँच अंग और समय खंड दिए गए हैं। यहाँ आप तिथि, नक्षत्र, योग, करण और शुभ-अशुभ मुहूर्तों का सटीक विवरण देख सकते हैं।
नई दिल्ली के लिए 5 नवंबर 2026 का दैनिक पंचांग
वैदिक पंचांग की गणना स्थानीय सूर्योदय पर आधारित होती है। नीचे दी गई तालिका में नई दिल्ली के लिए 5 नवंबर 2026 के मान दिए गए हैं। ये मान स्थानीय सूर्योदय के समय मापे गए हैं और दिन में आगे चलकर बदल सकते हैं। अपने शहर के सटीक समय की पुष्टि करने के लिए पंचांग पृष्ठ पर जाकर शहर चुनें।
| पंचांग अंग एवं समय | मान एवं विवरण (नई दिल्ली) |
|---|---|
| वार | गुरुवार (Guruvar, स्वामी ग्रह: बृहस्पति) |
| तिथि | एकादशी (कृष्ण पक्ष) |
| नक्षत्र | उत्तरा फाल्गुनी (प्रथम पद, स्वामी: सूर्य) |
| योग | वैधृति |
| करण | बालव |
| सूर्योदय | 06:35 |
| सूर्यास्त | 17:33 |
| चंद्रोदय | 02:42 |
| चंद्रास्त | 15:05 |
| अभिजित मुहूर्त | 11:42 - 12:26 |
| राहु काल | 13:26 - 14:48 |
| यमगण्ड | 06:35 - 07:58 |
| गुलिक काल | 09:20 - 10:42 |
तालिका के मान नई दिल्ली के अक्षांश 28.6139 और देशांतर 77.209 पर आधारित हैं। सूर्योदय और सूर्यास्त का समय स्थान बदलने पर बदल जाता है, इसलिए अन्य शहरों के पाठक स्थानीय सूर्योदय के अनुसार ही मान देखें।
पंचांग के पाँच अंगों का अर्थ और खगोलीय आधार
पंचांग का अर्थ है पाँच अंग। दैनिक काल-गणना को समझने के लिए इन पाँच अंगों का अध्ययन किया जाता है। एक शिक्षक के रूप में मैं आपको इनका खगोलीय आधार स्पष्ट रूप से समझाता हूँ:
- वार: यह सौर दिवस का सूचक है। वैदिक गणना में वार एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक माना जाता है। 5 नवंबर 2026 को गुरुवार है, जिसके स्वामी बृहस्पति हैं।
- तिथि: चंद्रमा और सूर्य के बीच के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। चंद्रमा जब सूर्य से 12 अंश (12°) आगे बढ़ता है, तब एक तिथि बनती है। एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं; 15 शुक्ल पक्ष में और 15 कृष्ण पक्ष में। आज सूर्योदय पर कृष्ण पक्ष की एकादशी है।
- नक्षत्र: क्रांतिवृत्त पर चंद्रमा की निरयण स्थिति नक्षत्र कहलाती है। आकाश को 27 नक्षत्रों में बाँटा गया है, जहाँ प्रत्येक नक्षत्र 13 अंश 20 कला (13°20′) का होता है। प्रत्येक नक्षत्र में 4 पद (3°20′ प्रत्येक) होते हैं। आज सूर्योदय पर उत्तरा फाल्गुनी का प्रथम पद है, जिसके स्वामी सूर्य हैं।
- योग: निरयण सूर्य और चंद्रमा के स्पष्ट भोगांशों का जोड़ योग कहलाता है। यह भी 13°20′ के 27 भागों में बँटा है। आज का योग वैधृति है।
- करण: तिथि के आधे भाग को करण कहते हैं, जिसका मान 6 अंश (6°) होता है। एक तिथि में दो करण होते हैं। 7 चर करण चक्र में घूमते हैं और 4 स्थिर करण (शकुनि, चतुष्पद, नाग, किंस्तुघ्न) होते हैं। आज सूर्योदय पर बालव करण है।
दिन के शुभ मुहूर्त और चौघड़िया
दैनिक जीवन में किसी नए कार्य के आरंभ के लिए शुभ समय देखा जाता है। परंपरा में अभिजित मुहूर्त को विशेष रूप से अनुकूल माना जाता है। सूर्योदय से सूर्यास्त के दिन-मान को 15 समान भागों में बाँटने पर आठवाँ भाग अभिजित मुहूर्त कहलाता है। आज नई दिल्ली में अभिजित मुहूर्त 11:42 से 12:26 तक रहेगा।
दिन के कार्यों की योजना के लिए दिन का चौघड़िया भी देखा जाता है। इसमें अमृत, शुभ, लाभ और चर को नए कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है। 5 नवंबर 2026 को दिन के चौघड़िया खंड इस प्रकार हैं:
- शुभ: 06:35 - 07:58 (अनुकूल)
- रोग: 07:58 - 09:20 (प्रतिकूल)
- उद्वेग: 09:20 - 10:42 (प्रतिकूल)
- चर: 10:42 - 12:04 (अनुकूल)
- लाभ: 12:04 - 13:26 (अनुकूल)
- अमृत: 13:26 - 14:48 (अनुकूल)
- काल: 14:48 - 16:11 (प्रतिकूल)
- शुभ: 16:11 - 17:33 (अनुकूल)
यदि कोई सामान्य नित्य कर्म चल रहा हो, तो उसे रोकने की आवश्यकता नहीं होती। केवल नया संकल्प या यात्रा शुरू करते समय अनुकूल समय का चयन किया जाता है।
अशुभ काल और समय गणना के नियम
वैदिक पंचांग में राहु काल, यमगण्ड और गुलिक काल को नए कार्यों के आरंभ के लिए पारंपरिक रूप से त्याज्य माना गया है। यह विभाजन सूर्योदय से सूर्यास्त के समय को आठ बराबर भागों में बाँटकर निकाला जाता है, जिसमें वार के अनुसार एक निश्चित भाग तय होता है।
- राहु काल: 13:26 से 14:48 तक। इस समय नए कार्यों का आरंभ पारंपरिक रूप से टाला जाता है, परंतु नियमित नित्य कर्म सामान्य रूप से चलते रहते हैं।
- यमगण्ड: 06:35 से 07:58 तक। इसे भी नए कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता।
- गुलिक काल: 09:20 से 10:42 तक। यह भी दिन के आठ भागों में से एक निश्चित अप्रशस्त खंड है।
यहाँ गणना के लिए अयनांश लाहिड़ी (चित्रपक्ष) पद्धति अपनाई गई है। सूर्योदय और सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे के क्षितिज पर आने और वायुमंडलीय अपवर्तन के आधार पर तय होते हैं। जो पंचांग सूर्य-बिंब का केंद्र लेते हैं, उनके समय में 3 से 5 मिनट तक का अंतर आ सकता है। सामान्य छपे पंचांगों से भी 1 से 2 मिनट का अंतर संभव है।
ग्रहों के प्रभाव के लिए होरा व्यवस्था भी उपयोगी होती है। प्रत्येक होरा अपने स्वामी ग्रह के अनुसार कार्यों के लिए अनुकूल मानी जाती है; जैसे बृहस्पति की होरा विद्या और वित्त, शुक्र की कला, बुध की व्यापार व लेखन, सूर्य की प्रशासन और चंद्र की होरा यात्रा के लिए अनुकूल मानी जाती है।
मुख्य बातें
- 5 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में सूर्योदय पर कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि, उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र, वैधृति योग और बालव करण उपस्थित हैं।
- दिन का श्रेष्ठ समय अभिजित मुहूर्त 11:42 से 12:26 तक रहेगा, जो नए कार्य के लिए पारंपरिक रूप से अनुकूल माना जाता है।
- राहु काल दोपहर 13:26 से 14:48 तक रहेगा; इस दौरान नया आरंभ टालने की परंपरा है, परंतु सामान्य नित्य कर्म जारी रह सकते हैं।
- पंचांग के सभी मान स्थानीय सूर्योदय 06:35 पर आधारित हैं और दिन में बदल सकते हैं, अतः अपने शहर के समय की पुष्टि पंचांग पृष्ठ पर अवश्य करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या पंचांग के ये मान पूरे दिन एक समान रहते हैं?
नहीं, पंचांग के पाँचों अंग स्थानीय सूर्योदय के समय मापे जाते हैं। तिथि, नक्षत्र, योग और करण दिन के दौरान समाप्त होकर अगले अंग में प्रवेश कर सकते हैं। इसलिए किसी अनुष्ठान के समय की वर्तमान स्थिति की पुष्टि करना आवश्यक होता है।
राहु काल में क्या नियमित दैनिक कार्य भी रोक देने चाहिए?
नहीं, परंपरा के अनुसार राहु काल में केवल नए कार्यों, व्यापारिक अनुबंधों या मांगलिक अनुष्ठानों की शुरुआत को टाला जाता है। आपके नियमित दैनिक कार्य सामान्य रूप से बिना रुकावट चलते रहते हैं।
अलग-अलग पंचांगों में सूर्योदय और राहु काल के समय में कुछ मिनटों का अंतर क्यों दिखता है?
यह अंतर गणना पद्धति के कारण आता है। हमारे पंचांग में सूर्योदय सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे के क्षितिज पर आने और वायुमंडलीय अपवर्तन के आधार पर निकाला जाता है। जो पंचांग सूर्य-बिंब का केंद्र लेते हैं, उनके समय में 3 से 5 मिनट तक का अंतर आ सकता है। इसके अलावा शहर के अक्षांश और देशांतर का सटीक मान भी समय को थोड़ा बदलता है।
5 नवंबर 2026 को नए कार्य शुरू करने के लिए कौन से चौघड़िया उपयुक्त माने जाते हैं?
परंपरा के अनुसार दिन के चौघड़िया में शुभ (06:35 - 07:58 तथा 16:11 - 17:33), चर (10:42 - 12:04), लाभ (12:04 - 13:26) और अमृत (13:26 - 14:48) को अनुकूल माना जाता है। किसी भी नए संकल्प या यात्रा के लिए इन समय खंडों को वरीयता दी जाती है।
आगे क्या करें। अपनी जगह के अनुसार समय देखने के लिए नीचे का पेज खोलें।
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