आज का पंचांग 6 नवंबर 2026, शुक्रवार: तिथि, नक्षत्र, योग, करण
इस पोस्ट में आपको 6 नवंबर 2026, शुक्रवार का पंचांग एक ही तालिका में मिलेगा।
साथ में हर अंग का सीधा अर्थ और दिन के शुभ-अशुभ समय भी समझाए गए हैं।
आज की पंचांग तालिका
नीचे की सभी जानकारी नई दिल्ली के लिए है। तिथि, नक्षत्र, योग और करण सूर्योदय के समय के मान हैं। ये दिन में आगे बदल सकते हैं। इसलिए इन्हें सुबह की स्थिति समझिए, पूरे दिन की स्थायी स्थिति नहीं।
| अंग / समय | आज का मान |
|---|---|
| वार | शुक्रवार (स्वामी ग्रह: शुक्र) |
| तिथि | कृष्ण पक्ष, द्वादशी |
| नक्षत्र | हस्त (स्वामी: चंद्रमा), पद 1 |
| योग | विष्कम्भ |
| करण | तैतिल |
| सूर्योदय | 06:36 |
| सूर्यास्त | 17:32 |
| राहु काल | 10:42 - 12:04 |
| यमगण्ड | 14:48 - 16:10 |
| गुलिक काल | 07:58 - 09:20 |
| अभिजित मुहूर्त | 11:42 - 12:26 |
इसके अलावा आज चंद्रोदय 03:40 पर और चंद्रास्त 15:35 पर है। चंद्रोदय सुबह तड़के होने का मतलब है कि चंद्रमा कृष्ण पक्ष के अंत की ओर है। यह सामान्य खगोलीय बात है।
पंचांग क्या है और पाँच अंग कौन से हैं
पंचांग का अर्थ है पाँच अंग। ये पाँच अंग हैं: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। भारतीय परंपरा में दिन को केवल तारीख से नहीं, इन पाँचों से पहचाना जाता है।
ये पाँचों मान एक ही जगह और एक ही समय के लिए गिने जाते हैं। हम यहाँ सूर्योदय का समय लेते हैं। इसी कारण दो शहरों में एक ही दिन थोड़ा अलग समय दिख सकता है।
तिथि: आज द्वादशी क्यों
तिथि चंद्रमा और सूर्य के बीच के अंतर से बनती है। यह अंतर हर 12 अंश बढ़ने पर एक नई तिथि शुरू होती है। एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं।
पहली 15 तिथियाँ शुक्ल पक्ष की होती हैं और बाकी 15 कृष्ण पक्ष की। आज कृष्ण पक्ष की द्वादशी है। यानी पूर्णिमा के बाद का दूसरा पखवाड़ा चल रहा है और चंद्रमा घट रहा है।
माना जाता है कि हर तिथि का अपना स्वभाव और अपने देवता होते हैं। व्रत और पूजा की तिथि तय करते समय पंचांग यही देखता है कि कौन सी तिथि कब तक रहती है। इसलिए व्रत रखने वाले सिर्फ़ सुबह की तिथि देखकर निर्णय न लें। तिथि के समाप्त होने का समय भी देखें।
वार: शुक्रवार और शुक्र ग्रह
वार सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक माना जाता है। आज शुक्रवार है और इसका स्वामी ग्रह शुक्र है। परंपरा में शुक्र को संबंधों और कलाओं से जोड़ा जाता है। यह मान्यता है, कोई निश्चित परिणाम नहीं।
वार से ही राहु काल, यमगण्ड और गुलिक काल का स्थान तय होता है। इस पर आगे बात करेंगे।
नक्षत्र: हस्त और उसका पद
नक्षत्र चंद्रमा की निरयण स्थिति से तय होता है। आकाश के वृत्त को 27 बराबर भागों में बाँटा गया है। हर भाग 13 अंश 20 कला का होता है। हर नक्षत्र के 4 पद होते हैं।
आज सूर्योदय के समय चंद्रमा हस्त नक्षत्र में है, और यह पद 1 है। हस्त के स्वामी चंद्रमा माने गए हैं। नक्षत्र का उपयोग परंपरा में नामकरण, जन्म-कुंडली और कुछ संस्कारों के मुहूर्त के लिए होता है।
योग और करण का अर्थ
योग: यह सूर्य और चंद्रमा की निरयण स्थितियों को जोड़कर बनता है। यहाँ भी 27 योग हैं और हर योग 13 अंश 20 कला का है। आज का योग विष्कम्भ है। योग तिथि या नक्षत्र से अलग गिना जाता है, इसलिए इसे अलग से देखना पड़ता है।
करण: करण तिथि का आधा भाग होता है, यानी 6 अंश का। सात चर करण क्रम से बार-बार आते हैं। शकुनि, चतुष्पद, नाग और किंस्तुघ्न स्थिर करण कहलाते हैं। आज का करण तैतिल है, जो चर करणों में से एक है।
आज के समय: अशुभ और शुभ
राहु काल, यमगण्ड और गुलिक काल सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को 8 बराबर भागों में बाँटकर निकलते हैं। हर वार के लिए इनमें से एक निश्चित भाग लिया जाता है। परंपरा में इन समयों को नए शुभ कार्य शुरू करने के लिए टाला जाता है। रोज़ के सामान्य काम इनमें चलते रहते हैं।
आज के अशुभ काल:
- गुलिक काल: 07:58 - 09:20
- राहु काल: 10:42 - 12:04
- यमगण्ड: 14:48 - 16:10
अभिजित मुहूर्त दिन के 15 मुहूर्तों में आठवाँ होता है। आज यह 11:42 - 12:26 है। ध्यान दीजिए कि यह राहु काल के भीतर आता है। इसलिए जो व्यक्ति राहु काल से बचना चाहता है, वह इस खिड़की को बहुत सोच-समझकर चुने। अपने कुल-पुरोहित से पूछ लेना सबसे अच्छा रहेगा।
आज की चौघड़िया
चौघड़िया दिन को आठ भागों में बाँटती है। परंपरा में अमृत, शुभ, लाभ और चर को अच्छा माना जाता है। काल, रोग और उद्वेग को टाला जाता है। आज की दिन की चौघड़िया यह है:
| चौघड़िया | समय | परंपरा में स्थिति |
|---|---|---|
| चर | 06:36 - 07:58 | शुभ |
| लाभ | 07:58 - 09:20 | शुभ |
| अमृत | 09:20 - 10:42 | शुभ |
| काल | 10:42 - 12:04 | अशुभ |
| शुभ | 12:04 - 13:26 | शुभ |
| रोग | 13:26 - 14:48 | अशुभ |
| उद्वेग | 14:48 - 16:10 | अशुभ |
| चर | 16:10 - 17:32 | शुभ |
एक बात पर ध्यान दें। गुलिक काल 07:58 - 09:20 है, जबकि उसी समय चौघड़िया लाभ है। इसी तरह राहु काल के समय चौघड़िया काल है। अलग-अलग नियम अलग संकेत दे सकते हैं। ऐसे में आप अपनी परंपरा का नियम मानिए, और जहाँ संदेह हो वहाँ बड़ों से पूछिए।
इस जानकारी का उपयोग कैसे करें
- पहले देखिए कि आपका कार्य कौन सी तिथि पर बताया गया है। व्रत या पूजा हो तो तिथि का समाप्ति-समय भी देखिए।
- फिर राहु काल, यमगण्ड और गुलिक काल देखिए। नया शुभ कार्य हो तो इनसे बचने की परंपरा है।
- उसके बाद चौघड़िया में अपने कार्य के लिए शुभ खंड चुनिए।
- अंत में अपना शहर देखिए। समय शहर के अनुसार बदलता है।
यह पंचांग खगोलीय गणना से बना है। छपे हुए या दूसरे पंचांगों से कुछ मिनट का अंतर संभव है। व्रत, पर्व या संस्कार का अंतिम समय अपने कुल-पुरोहित या स्थानीय पंचांग से मिला लीजिए। अपने शहर के सही समय के लिए Panchang पेज पर तारीख और शहर चुनकर देख लीजिए।
मुख्य बातें
- आज, 6 नवंबर 2026, शुक्रवार को नई दिल्ली में कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि है।
- नक्षत्र हस्त (पद 1), योग विष्कम्भ और करण तैतिल है। ये सूर्योदय के मान हैं और दिन में बदल सकते हैं।
- सूर्योदय 06:36 और सूर्यास्त 17:32 है। राहु काल 10:42 - 12:04 है।
- अभिजित मुहूर्त 11:42 - 12:26 है, जो राहु काल के भीतर आता है।
- अपने शहर का समय Panchang पेज पर जाँच लें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आज की तिथि कौन सी है?
नई दिल्ली में सूर्योदय के समय कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि है। तिथि दिन में आगे बदल सकती है।
आज का राहु काल कब है?
नई दिल्ली के लिए आज राहु काल 10:42 - 12:04 है। परंपरा में नया शुभ कार्य इस समय टाला जाता है।
अभिजित मुहूर्त क्या है और आज कब है?
अभिजित मुहूर्त दिन के 15 मुहूर्तों में आठवाँ है। आज यह 11:42 - 12:26 है।
क्या ये समय दूसरे शहरों में भी वही रहेंगे?
नहीं। सूर्योदय और सूर्यास्त शहर के अनुसार बदलते हैं, इसलिए राहु काल और अभिजित भी बदलते हैं। अपने शहर का समय Panchang पेज पर देखिए।
हस्त नक्षत्र के स्वामी कौन हैं?
हस्त नक्षत्र के स्वामी चंद्रमा माने गए हैं।
आगे क्या करें। अपनी जगह के अनुसार समय देखने के लिए नीचे का पेज खोलें।
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