8 नवंबर 2026, रविवार पंचांग: जानिए तिथि, नक्षत्र, योग व करण के दैनिक मान
8 नवंबर 2026 के दिन पूजा या नए कार्यों के नियोजन के लिए यहाँ नई दिल्ली का पंचांग दिया गया है। इसमें आज के पाँचों अंगों के मान, उनके खगोलीय आधार और समय खंड शामिल हैं।
नई दिल्ली के लिए 8 नवंबर 2026 का दैनिक पंचांग
वैदिक पंचांग की गणना स्थानीय सूर्योदय से होती है। नीचे तालिका में नई दिल्ली के लिए 8 नवंबर 2026 के मान दिए गए हैं। ये मान स्थानीय सूर्योदय के समय के हैं और दिन में बदल सकते हैं। पाठक अपने शहर के समय की पुष्टि के लिए पंचांग पृष्ठ पर नगर का चयन करें।
| पंचांग अंग / समय खंड | मान (नई दिल्ली) | खगोलीय एवं पारंपरिक विवरण |
|---|---|---|
| वार (दिन) | रविवार | दिन के स्वामी: सूर्य |
| तिथि | चतुर्दशी (कृष्ण पक्ष) | सूर्य व चंद्रमा का अंतर |
| नक्षत्र | स्वाति (पद 1) | नक्षत्र स्वामी: राहु |
| योग | आयुष्मान | सूर्य-चंद्र स्पष्ट योग |
| करण | शकुनि | स्थिर करण |
| सूर्योदय | 06:38 | सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे का उदय |
| सूर्यास्त | 17:31 | सायंकाल का समय |
| अभिजित मुहूर्त | 11:42 - 12:26 | दिन का 8वाँ मुहूर्त |
| राहु काल | 16:09 - 17:31 | दिन का 8वाँ भाग |
| यमगण्ड | 12:04 - 13:26 | त्याज्य समय खंड |
| गुलिक काल | 14:48 - 16:09 | त्याज्य समय खंड |
पंचांग के पाँच अंगों का अर्थ और उनकी गणना विधि
पंचांग का अर्थ 'पाँच अंग' है। ये पाँच अंग तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण हैं। आइए इनके अर्थ और गणना के नियमों को समझें:
1. तिथि: चंद्रमा और सूर्य के बीच के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। हर 12° पर एक तिथि बनती है। एक चंद्र-मास में 30 तिथियाँ होती हैं। पहली 15 तिथियाँ शुक्ल पक्ष की होती हैं, जो पूर्णिमा पर समाप्त होती हैं। शेष 15 तिथियाँ कृष्ण पक्ष की होती हैं, जो अमावस्या पर पूर्ण होती हैं। 8 नवंबर 2026 को सूर्योदय के समय कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि है।
2. वार: वार का अर्थ सप्ताह का दिन है। इसकी गणना स्थानीय सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होती है। आज रविवार है और इसके स्वामी ग्रह सूर्य हैं। नवग्रह परंपरा में सूर्य से केतु तक नौ ग्रह देवता हैं, जिनमें वार के स्वामी ग्रह सम्मिलित हैं।
3. नक्षत्र: चंद्रमा की निरयण स्थिति को नक्षत्र कहते हैं। हर 13°20′ पर एक नक्षत्र बनता है और कुल 27 नक्षत्र होते हैं। हर नक्षत्र के 4 पद होते हैं, जहाँ प्रत्येक पद 3°20′ का होता है। आज सूर्योदय पर स्वाति नक्षत्र का पहला पद (पद 1) है, जिसके स्वामी राहु हैं।
4. योग: निरयण सूर्य और चंद्रमा के स्पष्ट भोगांशों के योग को योग कहते हैं। यह भी हर 13°20′ पर बदलता है और कुल 27 योग होते हैं। आज सूर्योदय के समय आयुष्मान योग है।
5. करण: तिथि के आधे भाग को करण कहते हैं, जिसका मान 6° होता है। इनमें 7 चर करण क्रम से दोहराते हैं, और शकुनि, चतुष्पद, नाग, किंस्तुघ्न स्थिर करण हैं। आज सूर्योदय पर शकुनि करण है।
शुभ और अशुभ समय खंडों का विभाजन
कार्यों के सही नियोजन के लिए दिन को शुभ और त्याज्य समय खंडों में बाँटा जाता है:
अभिजित मुहूर्त: दिन के 15 मुहूर्तों में आठवाँ (8वाँ) मुहूर्त अभिजित मुहूर्त कहलाता है। 8 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में अभिजित मुहूर्त 11:42 से 12:26 तक रहेगा। परंपरा में इसे नए कार्यों के आरंभ के लिए अनुकूल माना जाता है।
अशुभ काल: राहु काल, यमगण्ड और गुलिक काल की गणना सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को 8 बराबर भागों में बाँटकर की जाती है। वार के अनुसार इनका एक भाग निश्चित होता है:
- राहु काल: रविवार को राहु काल दिन का आठवाँ (8वाँ) भाग होता है। आज यह समय 16:09 से 17:31 तक रहेगा। परंपरा में नए कार्य के लिए इसे टाले जाने वाला समय माना गया है, यद्यपि नित्य कर्म चलते रहते हैं।
- यमगण्ड: रविवार को यमगण्ड 12:04 से 13:26 तक है। इसे नए कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता।
- गुलिक काल: रविवार को गुलिक काल 14:48 से 16:09 तक रहेगा।
- ब्रह्म मुहूर्त: रात्रि के 15 मुहूर्तों में 14वाँ मुहूर्त ब्रह्म मुहूर्त कहलाता है।
दिन का चौघड़िया मुहूर्त
दैनिक कार्यों के लिए दिन के चौघड़िया में चर, लाभ, अमृत और शुभ अनुकूल तथा उद्वेग, काल और रोग त्याज्य माने जाते हैं। 8 नवंबर 2026 को नई दिल्ली के लिए दिन का चौघड़िया क्रम इस प्रकार है:
- उद्वेग (त्याज्य): 06:38 से 07:59
- चर (अनुकूल): 07:59 से 09:21
- लाभ (अनुकूल): 09:21 से 10:43
- अमृत (अनुकूल): 10:43 से 12:04
- काल (त्याज्य): 12:04 से 13:26
- शुभ (अनुकूल): 13:26 से 14:48
- रोग (त्याज्य): 14:48 से 16:09
- उद्वेग (त्याज्य): 16:09 से 17:31
खगोलीय गणना के नियम और स्थानीय समय की शुद्धता
यह पंचांग आधुनिक खगोलीय गणना और पारंपरिक नियमों पर आधारित है। इसमें अयनांश के रूप में लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश का उपयोग है। सूर्योदय और सूर्यास्त की गणना सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे के क्षितिज पर आने से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित होती है।
अलग-अलग पंचांगों में समय का थोड़ा अंतर आने के कारण इस प्रकार हैं:
- सूर्य-बिंब की स्थिति: जो पंचांग सूर्य-बिंब के केंद्र को लेते हैं, उनके सूर्योदय-सूर्यास्त और राहु काल आदि में 3 से 5 मिनट तक का अंतर आ सकता है।
- छपे पंचांगों से अंतर: यह पंचांग पारंपरिक नियमों से खगोलीय गणना द्वारा बना है। इसलिए छपे पंचांगों से 1 से 2 मिनट का अंतर संभव है।
- स्थानीय अक्षांश-देशांतर: नगर की भौगोलिक स्थिति बदलने से स्थानीय समय बदलता है। नई दिल्ली के मान दूसरे नगरों में सीधे लागू नहीं होते।
- ब्राउज़र में गणना: पाठक पंचांग पृष्ठ पर 'Start typing a city…' से अपना शहर चुन सकते हैं। गणना आपके ब्राउज़र में ही होती है।
- पुरोहित परामर्श: किसी भी व्रत या पर्व का अंतिम समय अपने कुल-पुरोहित या स्थानीय पंचांग से अवश्य मिला लें।
मुख्य बातें
- 8 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में सूर्योदय 06:38 और सूर्यास्त 17:31 पर होगा।
- सूर्योदय के समय कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि, स्वाति नक्षत्र (पद 1), आयुष्मान योग और शकुनि करण हैं।
- दिन का अभिजित मुहूर्त 11:42 से 12:26 तक रहेगा।
- राहु काल शाम 16:09 से 17:31 तक रहेगा, जिसमें नया काम टालने की परंपरा है।
- पंचांग के मान सूर्योदय के समय के हैं; अन्य शहरों के पाठक पंचांग पृष्ठ पर समय की पुष्टि करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
8 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में राहु काल किस समय रहेगा?
नई दिल्ली में 8 नवंबर 2026 को राहु काल 16:09 से 17:31 तक रहेगा। रविवार को यह दिन का आठवाँ भाग होता है। परंपरा में इस समय नया कार्य टालने का नियम है, पर नित्य कर्म चलते रहते हैं।
पंचांग के पाँच अंगों के मान सूर्योदय के समय के क्यों माने जाते हैं?
वैदिक काल-गणना में दिन का आरंभ स्थानीय सूर्योदय से होता है। पंचांग के पाँचों अंग सूर्योदय के समय मापे जाते हैं। चंद्रमा और सूर्य की गति के कारण तिथि, नक्षत्र, योग और करण दिन में आगे बदल सकते हैं।
8 नवंबर 2026 को दिन का अभिजित मुहूर्त कब से कब तक है?
नई दिल्ली में 8 नवंबर 2026 को अभिजित मुहूर्त 11:42 से 12:26 तक रहेगा। यह दिन के 15 मुहूर्तों में आठवाँ मुहूर्त होता है, जिसे शुभ कार्यों के आरंभ हेतु अनुकूल माना जाता है।
अलग-अलग पंचांगों के समय में 3 से 5 मिनट का अंतर क्यों दिखता है?
सूर्य-बिंब के केंद्र को आधार बनाने वाले पंचांगों में सूर्योदय, सूर्यास्त और राहु काल में 3 से 5 मिनट तक का अंतर आ सकता है। यहाँ गणना सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे और अपवर्तन पर आधारित है।
आगे क्या करें। अपनी जगह के अनुसार समय देखने के लिए नीचे का पेज खोलें।
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