अभिजित मुहूर्त क्या है: दिन का श्रेष्ठ समय और महत्व

इस लेख में आप जानेंगे कि अभिजित मुहूर्त क्या है और यह दिन के किस समय आता है।
साथ ही सीखेंगे कि इसकी गणना खुद कैसे करें और इसमें कार्य करने के पारंपरिक नियम क्या हैं।
अभिजित मुहूर्त का अर्थ
"अभिजित" का अर्थ है जो हर ओर से विजयी हो। इसी भाव से इस मुहूर्त को विजय देने वाला समय माना जाता है।
पारंपरिक पंचांग में दिन के समय को मुहूर्तों में बाँटा गया है। दिन में पंद्रह और रात में पंद्रह मुहूर्त गिने जाते हैं। इनमें दिन का आठवाँ मुहूर्त अभिजित है।
नाम का एक संबंध अभिजित नक्षत्र से भी बताया जाता है। यह उत्तराषाढ़ा और श्रवण के बीच का छोटा नक्षत्र माना जाता है। परंतु मुहूर्त की गणना नक्षत्र से नहीं, दिन की लंबाई से होती है। इन दोनों को आपस में न मिलाएँ।
एक बात ध्यान रखिए। यह मुहूर्त घड़ी के किसी तय समय पर नहीं आता। दिन छोटा-बड़ा होता है, इसलिए इसका समय भी हर दिन और हर शहर में थोड़ा बदलता है।
अभिजित मुहूर्त की गणना कैसे करें
गणना सरल है। पहले अपने शहर का सूर्योदय और सूर्यास्त देखिए। फिर ये चरण अपनाइए।
- सूर्यास्त के समय में से सूर्योदय का समय घटाइए। यह दिनमान है।
- दिनमान को पंद्रह से भाग दीजिए। यह एक मुहूर्त की अवधि है।
- इस अवधि को सात से गुणा कीजिए और परिणाम सूर्योदय में जोड़िए। यही अभिजित का आरंभ है।
- आरंभ में एक मुहूर्त की अवधि और जोड़िए। यह अभिजित का अंत है।
यानी पहले सात मुहूर्त बीतने पर अभिजित शुरू होता है और आठवें मुहूर्त के अंत तक चलता है। दिन के पंद्रह भागों में यह ठीक बीच का भाग है, इसलिए इसका मध्य स्थानीय दोपहर के आसपास पड़ता है।
उदाहरण (केवल समझाने के लिए कल्पित समय): मान लीजिए सूर्योदय सुबह 6:00 बजे और सूर्यास्त शाम 6:00 बजे है।
- दिनमान = 12 घंटे
- एक मुहूर्त = 12 घंटे ÷ 15 = एक घंटे का चार-पाँचवाँ भाग
- सात मुहूर्त = 7 × (4/5) घंटे = 5 घंटे 36 मिनट
- आरंभ = 6:00 + 5:36 = 11:36 बजे
- अंत = आरंभ + एक मुहूर्त = 12:24 बजे
इस कल्पित दिन में अभिजित मुहूर्त 11:36 से 12:24 तक होगा। असली दिनों में सूर्योदय-सूर्यास्त बदलते हैं, इसलिए आपका समय अलग निकलेगा।
पंचांग पृष्ठ से समय कैसे देखें
रोज़ हाथ से गणना करना ज़रूरी नहीं। हमारे ज्ञानकोश में "आज का पंचांग एवं मुहूर्त" पृष्ठ है। वहाँ आप तारीख और शहर चुन सकते हैं। पृष्ठ पर पिछला, आज और अगला के बटन भी हैं, जिनसे दिन आगे-पीछे किए जा सकते हैं।
पृष्ठ पर पंचांग के पाँचों अंग उसी शहर के सूर्योदय से गिने जाते हैं। साथ में सूर्योदय-सूर्यास्त, शुभ मुहूर्त और अशुभ काल दिए रहते हैं। शुभ मुहूर्त में अभिजित और ब्रह्म मुहूर्त आते हैं। अशुभ काल में राहु काल, यमगण्ड और गुलिक काल हैं।
इसलिए किसी दिन का मुहूर्त देखना हो तो पहले सही शहर और तारीख चुनिए। सबसे आम चूक यही है कि लोग दूसरे शहर का समय देख लेते हैं। कुछ मिनट का अंतर भी आपको मुहूर्त की सीमा से बाहर कर सकता है।
अभिजित, ब्रह्म मुहूर्त और राहु काल में अंतर
तीनों नाम अक्सर साथ आते हैं, पर इनका स्वभाव अलग है। नीचे सरल तुलना है।
| काल | कब आता है | पारंपरिक मान्यता |
|---|---|---|
| अभिजित मुहूर्त | दिन का आठवाँ मुहूर्त, दोपहर के आसपास | शुभ कार्य के लिए अनुकूल माना जाता है |
| ब्रह्म मुहूर्त | सूर्योदय से पहले; समय पंचांग पृष्ठ पर दिया रहता है | जप, ध्यान और पाठ के लिए उपयुक्त माना जाता है |
| राहु काल | दिन का एक आठवाँ भाग; वार के अनुसार बदलता है | नया कार्य आरंभ करने से बचने की परंपरा है |
ध्यान दें कि अभिजित और राहु काल कभी-कभी एक-दूसरे को छू सकते हैं। ऐसे में पारंपरिक सलाह यह है कि अशुभ काल से बचकर कार्य करें। इसलिए अभिजित के साथ राहु काल का समय भी उसी पृष्ठ पर मिलाइए।
अभिजित मुहूर्त में क्या करें: पारंपरिक नियम
माना जाता है कि जब कोई और शुभ मुहूर्त न मिल रहा हो और काम टाला न जा सके, तब अभिजित सहारा देता है। परंपरा में इसे विशेष स्थिति का समाधान समझा गया है, हर बात की छूट नहीं। इन नियमों को याद रखिए।
- पहले तैयारी, फिर मुहूर्त। सामग्री, स्थान और लोग पहले से तैयार रखिए। मुहूर्त के बीच में सामान ढूँढना ठीक नहीं।
- आरंभ का काम छोटा रखिए। जैसे पूजा का संकल्प, दीप जलाना, किसी नए कार्य का पहला चरण। पूरा काम उसी मुहूर्त में निपटाना आवश्यक नहीं है।
- राहु काल से टकराव देखिए। दोनों का समय मिलता हो तो अशुभ काल से बाहर वाला हिस्सा चुनिए।
- स्थानीय परंपरा पूछिए। कुछ परिवारों और क्षेत्रों में वार के आधार पर अलग मत मिलते हैं। अपने कुल-पुरोहित या बड़ों की बात को महत्व दीजिए।
- मन की शुद्धता सबसे ज़रूरी है। समय सही हो और नीयत ठीक न हो, तो मुहूर्त का अर्थ नहीं रहता।
यह जानकारी परंपरा पर आधारित है। इससे किसी परिणाम का वादा नहीं किया जा सकता। स्वास्थ्य, कानूनी या पैसों के बड़े निर्णय केवल मुहूर्त देखकर न लें। उनके लिए संबंधित योग्य व्यक्ति की सलाह लीजिए।
देवता और पर्वों से संबंध
मध्याह्न का समय हमारी कथाओं में कई जगह आता है। हमारे पर्व-पृष्ठ पर राम नवमी को चैत्र शुक्ल नवमी का मध्याह्न जन्मोत्सव बताया गया है। इसी कारण भक्त उस दिन दोपहर के समय का विशेष ध्यान रखते हैं।
विजयादशमी के लेख में "विजय मुहूर्त" का उल्लेख मिलता है। विजय का भाव अभिजित के अर्थ से मेल खाता है, पर दोनों एक ही चीज़ नहीं हैं। पर्व की पूजा का मुहूर्त उस पर्व की तिथि और परंपरा से तय होता है। उसके लिए उसी पर्व का लेख देखिए।
आज, 8 नवंबर 2026 को, दीपावली का लक्ष्मी-गणेश पूजन है। उस पूजा का समय अलग पूजन मुहूर्त से देखा जाता है, केवल अभिजित से नहीं। पर्व कैलेंडर में इसका अलग लेख है। नई पुस्तक, नए खाते का पहला पन्ना या यात्रा के संकल्प जैसे दैनिक कामों के लिए अभिजित देखना अधिक सहज है।
शास्त्रों में दिन के विभाजन और मुहूर्त की चर्चा मिलती है। यहाँ किसी श्लोक को उद्धृत करने की आवश्यकता नहीं है। हमारे ज्ञानकोश में कोई काल्पनिक मंत्र या श्लोक नहीं लिखा जाता। अपने इष्ट का जो मंत्र आप पहले से जपते हैं, वही मुहूर्त में जपिए।
रोज़ के अभ्यास का सरल तरीका
अगर आप इसे आदत बनाना चाहते हैं, तो यह क्रम रखिए।
- सुबह उठकर पंचांग पृष्ठ खोलिए और अपना शहर चुनिए।
- अभिजित और राहु काल का समय एक कागज़ पर लिख लीजिए।
- दिन के जिस काम को शुभ आरंभ देना है, उसे अभिजित के भीतर रखिए।
- उस समय दीप जलाकर इष्ट को स्मरण कीजिए और काम का पहला चरण कीजिए।
कुछ दिन ऐसा करने से आपको दिन की लंबाई का अनुभव होने लगेगा। आप देखेंगे कि अभिजित हमेशा लगभग दोपहर के पास रहता है, पर घड़ी के हिसाब से खिसकता है। यही गणना की समझ है।
मुख्य बातें
- अभिजित मुहूर्त दिन का आठवाँ मुहूर्त है। दिनमान को पंद्रह से भाग देकर इसे निकाला जाता है।
- इसका समय हर शहर और हर दिन बदलता है, इसलिए सही शहर और तारीख चुनकर ही देखिए।
- माना जाता है कि यह शुभ आरंभ के लिए अनुकूल है, पर राहु काल से मिलान ज़रूर कीजिए।
- पर्व की पूजा का अपना मुहूर्त होता है। उसे अभिजित से न बदलिए।
- यह परंपरा की जानकारी है। इसे किसी परिणाम का वादा न समझिए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अभिजित मुहूर्त कितने समय का होता है?
यह दिन की लंबाई का पंद्रहवाँ भाग है। इसलिए दिन बड़ा हो तो थोड़ा लंबा और छोटा हो तो थोड़ा छोटा हो सकता है। सही अवधि के लिए अपने शहर का पंचांग देखिए।
अभिजित मुहूर्त का सही समय कहाँ देखें?
हमारे ज्ञानकोश के "आज का पंचांग एवं मुहूर्त" पृष्ठ पर तारीख और शहर चुनिए। वहाँ शुभ मुहूर्त वाले भाग में अभिजित और ब्रह्म मुहूर्त का समय दिया जाता है। अशुभ काल में राहु काल, यमगण्ड और गुलिक काल देखे जा सकते हैं।
क्या अभिजित और विजय मुहूर्त एक ही हैं?
नहीं। विजयादशमी के लेख में विजय मुहूर्त उस पर्व की पूजा-परंपरा से जुड़ा है। अभिजित दैनिक पंचांग का आठवाँ मुहूर्त है। भाव समान लग सकता है, पर गणना और उपयोग अलग हैं।
क्या अभिजित में हर काम किया जा सकता है?
ऐसा नहीं कहा जा सकता। परंपरा इसे शुभ आरंभ के लिए अनुकूल मानती है, पर राहु काल से टकराव और स्थानीय मान्यता भी देखी जाती है। बड़े निर्णयों के लिए व्यावहारिक सलाह भी लीजिए।
ब्रह्म मुहूर्त और अभिजित में कौन-सा पहले आता है?
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले आता है और अभिजित दोपहर के आसपास। इसलिए दिन में पहले ब्रह्म मुहूर्त आता है। दोनों का समय एक ही पंचांग पृष्ठ पर मिल जाता है।
आगे क्या करें। अपनी जगह के अनुसार समय देखने के लिए नीचे का पेज खोलें।
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