COMMUNITY WEDDINGS

समुदाय एवं धर्म अनुसार विवाह

हिन्दू, सिख, मुस्लिम, ईसाई, पारसी, जैन, बौद्ध और नागरिक विवाह — हर परंपरा की मुख्य विधि, सांस्कृतिक रस्में और उसे मान्यता देने वाला क़ानून।

सम्मान और सटीकता

ध्यान दें

यह पेज हर परंपरा का सामान्य, प्रलेखित रूप बताता है। हर समुदाय के भीतर भी विविधता है — धार्मिक विधि के लिए अपने धर्मगुरु (पुरोहित, ग्रंथी, क़ाज़ी, पादरी, दस्तूर) की बात अंतिम है।

क़ानूनी जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है, क़ानूनी सलाह नहीं। अपने मामले के लिए वर्तमान नियम संबंधित राज्य सरकार या किसी वकील से पुष्टि करें।

01क़ानून एक नज़र में

कौन-सा विवाह किस क़ानून से

परंपराक़ानूनकौन संपन्न कराता हैमुख्य विधि
हिन्दू, जैन, बौद्ध, सिखहिन्दू विवाह अधिनियम, 1955पुरोहित / परंपरा अनुसारकिसी भी पक्ष की प्रचलित रीति (जैसे सप्तपदी)
सिखआनंद विवाह अधिनियम, 1909 (संशोधन 2012)ग्रंथीचार लावां
मुस्लिममुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) एप्लिकेशन एक्ट, 1937क़ाज़ीइजाब-ओ-क़बूल, मेहर, निकाहनामा
ईसाईभारतीय ईसाई विवाह अधिनियम, 1872लाइसेंसधारी धर्मगुरु / रजिस्ट्रारप्रतिज्ञाएँ, अंगूठी
पारसीपारसी विवाह और तलाक़ अधिनियम, 1936पुरोहित + दो पारसी गवाहआशीर्वाद
कोई भी / अंतरधार्मिकविशेष विवाह अधिनियम, 1954विवाह अधिकारीसूचना, 30 दिन, तीन गवाह

02परंपरा अनुसार

हर परंपरा विस्तार से

हिन्दू विवाह वैदिक परंपरा पर आधारित संस्कार है — अग्नि के साक्ष्य में कन्यादान, पाणिग्रहण, फेरे और सप्तपदी। क्षेत्र के अनुसार रूप बहुत बदलता है; विस्तार रस्में और क्षेत्रीय पेज पर है।

क़ानून

हिन्दू विवाह अधिनियम, 1955 हिन्दुओं के साथ-साथ बौद्ध, जैन और सिख धर्मावलंबियों पर भी लागू होता है (धारा 2)। धारा 5 में शर्तें हैं — जैसे विवाह के समय किसी भी पक्ष का जीवित जीवनसाथी न हो, और आयु दूल्हे की 21 व दुल्हन की 18 वर्ष हो। धारा 8 पंजीकरण से जुड़ी है; नियम राज्य बनाते हैं।

  • प्रमाण-स्तर: तथ्य (क़ानून)

आनंद कारज ('आनंद का कार्य') सिख विवाह की विधि है, जो आमतौर पर सुबह गुरुद्वारे में गुरु ग्रंथ साहिब की उपस्थिति में होती है।

विधि

  • अरदास और कीर्तन
  • पल्ला — दुल्हन के पिता दूल्हे के पल्ले (दुपट्टे) का छोर दुल्हन के हाथ में देते हैं
  • लावां — गुरु राम दास जी द्वारा रचित चार लावां का पाठ; हर लाव पर दंपती गुरु ग्रंथ साहिब की परिक्रमा करते हैं
  • कड़ाह प्रसाद और लंगर

क़ानून

आनंद विवाह अधिनियम, 1909 आनंद कारज को मान्यता देता है; 2012 के संशोधन से राज्यों को आनंद कारज विवाहों के पंजीकरण के नियम बनाने का प्रावधान हुआ।

  • प्रमाण-स्तर: तथ्य (क़ानून)

इस्लाम में निकाह एक अनुबंध है जो दोनों पक्षों की स्वतंत्र सहमति पर आधारित है। विधि आमतौर पर क़ाज़ी या धार्मिक विद्वान कराते हैं।

मुख्य तत्व

  • इजाब-ओ-क़बूल — प्रस्ताव और स्वीकृति
  • मेहर — दूल्हे की ओर से दुल्हन को तय राशि/संपत्ति, जो उसका अधिकार है
  • गवाह — मसलक (विचारधारा) के नियम अनुसार
  • ख़ुतबा और दुआ
  • निकाहनामा पर हस्ताक्षर

दक्षिण एशियाई परिवारों की सांस्कृतिक रस्में

  • मंगनी — सगाई
  • मांझा / उबटन — हल्दी जैसी रस्म
  • मेहंदी
  • रुख़सती — विदाई
  • वलीमा — निकाह के बाद दूल्हे के परिवार की ओर से भोज

क़ानून

मुस्लिम विवाह मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) एप्लिकेशन एक्ट, 1937 के अंतर्गत पर्सनल लॉ से शासित होते हैं। पंजीकरण के नियम राज्य अनुसार अलग हैं; पहले से संपन्न विवाह को विशेष विवाह अधिनियम की धारा 15 के तहत भी पंजीकृत कराया जा सकता है।

  • प्रमाण-स्तर: तथ्य (क़ानून)

ईसाई विवाह आमतौर पर चर्च में होता है — बाइबल पाठ, प्रतिज्ञाएँ (vows), अंगूठी बदलना, आशीर्वाद और रजिस्टर पर हस्ताक्षर। कई चर्चों में विवाह से पहले 'बैन्स' (सूचना) पढ़ी जाती है और विवाह-पूर्व परामर्श होता है।

भारतीय क्षेत्रीय परंपराएँ

  • मिन्नू — केरल के सीरियन ईसाई विवाह में दूल्हा दुल्हन को छोटा लटकन (मिन्नू) धागे से बाँधता है
  • मंत्रकोडी — दूल्हे की ओर से दुल्हन को दी जाने वाली साड़ी
  • रोस — गोवा के कैथोलिक परिवारों में विवाह-पूर्व नारियल-दूध की रस्म

क़ानून

भारतीय ईसाई विवाह अधिनियम, 1872 ईसाई विवाहों को शासित करता है — विवाह लाइसेंसधारी धर्मगुरु या विवाह रजिस्ट्रार द्वारा संपन्न होता है और उसका पंजीकरण होता है।

  • प्रमाण-स्तर: तथ्य (क़ानून)

पारसी (ज़रथुस्त्री) विवाह को 'लगन' कहते हैं। मुख्य विधि 'आशीर्वाद' है, जिसे दो पुरोहित संपन्न करते हैं।

  • माडव सरो — घर के द्वार पर आम का पौधा लगाना
  • हाथेवारो — दंपती के हाथ धागे से बाँधे जाते हैं
  • चावल डालना और आशीर्वाद
  • दुल्हन: अक्सर सफ़ेद साड़ी; गारा कढ़ाई की साड़ियाँ पारसी परंपरा की पहचान

क़ानून

पारसी विवाह और तलाक़ अधिनियम, 1936 के अनुसार विवाह पुरोहित द्वारा आशीर्वाद विधि से, दो पारसी गवाहों की उपस्थिति में संपन्न होना चाहिए।

  • प्रमाण-स्तर: तथ्य (क़ानून)

जैन विवाहों में कई रस्में हिन्दू विवाह जैसी होती हैं, पर विधि में जैन मंत्र (जैसे नवकार मंत्र) और तीर्थंकरों की पूजा होती है। श्रद्धालु परिवारों में भोजन जैन आहार-नियमों से बनता है — जड़ वाली सब्ज़ियाँ (प्याज़, लहसुन, आलू आदि) नहीं, और कई परिवार भोज सूर्यास्त से पहले रखते हैं।

योजना सुझाव: कैटरर को पहले से 'जैन मेनू' बताएं और अलग बर्तन/काउंटर तय करें।

  • प्रमाण-स्तर: प्रलेखित परंपरा

बौद्ध विवाह की विधियाँ परंपरा के अनुसार अलग हैं। महाराष्ट्र और देश के अन्य हिस्सों में अम्बेडकरवादी बौद्ध विवाहों में बुद्ध वंदना, त्रिशरण और पंचशील का पाठ, और बुद्ध व डॉ. अम्बेडकर के चित्र के सामने माला बदलना आम है। लद्दाख, सिक्किम और हिमालयी क्षेत्रों की बौद्ध परंपराएँ अलग हैं।

  • प्रमाण-स्तर: प्रलेखित परंपरा

विशेष विवाह अधिनियम, 1954 के तहत कोई भी दो व्यक्ति — धर्म की परवाह किए बिना, और बिना धर्म-परिवर्तन के — विवाह कर सकते हैं।

  • ज़िले के विवाह अधिकारी को सूचना, जहाँ कम से कम एक पक्ष सूचना से ठीक पहले 30 दिन से रह रहा हो (धारा 5)
  • सूचना प्रकाशित होती है; 30 दिन में आपत्ति दी जा सकती है (धारा 7)
  • तीन गवाहों की उपस्थिति में घोषणा पर हस्ताक्षर (धारा 11)
  • विवाह प्रमाण-पत्र
  • प्रमाण-स्तर: तथ्य (क़ानून)

03स्रोत

आधिकारिक स्रोत

क़ानूनों के पूरे और नवीनतम पाठ के लिए भारत सरकार का India Code पोर्टल (indiacode.nic.in) देखें — ऊपर दिए सभी अधिनियम वहाँ उपलब्ध हैं। राज्य के पंजीकरण नियम संबंधित राज्य सरकार की वेबसाइट पर मिलते हैं।

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