दोनों परंपराओं की सूची बनाएं
दोनों परिवार अपनी 'ज़रूरी' और 'वैकल्पिक' रस्मों की सूची बनाएं। अक्सर हर पक्ष की 2–3 ज़रूरी रस्में होती हैं जिन्हें एक ही कार्यक्रम में जोड़ा जा सकता है।
REGIONAL WEDDINGS
पंजाब से केरल, कश्मीर से असम तक — हर क्षेत्र की मुख्य रस्में, दुल्हन-दूल्हे की पारंपरिक वेशभूषा और अनोखी परंपराएँ, एक जगह।
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एक ही राज्य के भीतर भी जाति, समुदाय, ज़िले और परिवार के अनुसार रस्में बदलती हैं। यहाँ हर क्षेत्र के सबसे व्यापक रूप से दर्ज रूप दिए गए हैं — इन्हें 'प्रलेखित परंपरा' मानें, सबके लिए अनिवार्य नियम नहीं। अपने परिवार के बुज़ुर्गों और पुरोहित से मिलान ज़रूर करें।
कोई जानकारी आपके क्षेत्र या परिवार से अलग है? हमें संपर्क पेज से बताएं — सुधार दर्ज किए जाते हैं।
01एक नज़र में
| क्षेत्र | पहचान वाली रस्म | दुल्हन | दूल्हा |
|---|---|---|---|
| पंजाब | चूड़ा, कलीरे, जागो, मिलनी | लहंगा / सूट, चूड़ा | शेरवानी, साफ़ा, सेहरा |
| राजस्थान | पीठी, मायरा, तोरण | पोशाक, बोरला | अचकन, लहरिया साफ़ा |
| गुजरात | गोल धाणा, मामेरू, पोंखणा | पानेतर, घरचोला | शेरवानी / केडिया, साफ़ा |
| महाराष्ट्र | अंतरपट, मंगलाष्टक, अक्षता | नऊवारी / पैठणी, नथ | धोती-कुर्ता, फेटा |
| बंगाल | गाये होलुद, शुभो दृष्टि, सात पाक | लाल बनारसी, शाखा-पोला | धोती-पंजाबी, टोपोर |
| तमिलनाडु | काशी यात्रा, ऊंजल, मांगल्य धारणम् | कांचीपुरम साड़ी | वेष्टि, अंगवस्त्रम् |
| आंध्र / तेलंगाना | जीलकर्र बेल्लम्, तलंब्रालु | सफ़ेद-लाल किनारी साड़ी | पंचे, कुर्ता |
| केरल | ताली केट्टु, पुडवा कोडा, सद्या | कसवु साड़ी, कासु माला | कसवु मुंडु |
| बिहार / मिथिला | तिलक, मटकोड़, कोहबर | पियरी साड़ी | धोती-कुर्ता, पाग |
| कश्मीर (पंडित) | देवगोन, पोश पूजा | तरंग, देजिहोर | — |
| असम | जुरोन, पानी तोला | मूगा मेखेला-चादर | धोती, गमोसा |
| ओड़िशा | हाथ गंठी, लाजा होम, चौठी | — | — |
'—' का अर्थ है कि हमने इस क्षेत्र की वह जानकारी अभी सत्यापित करके नहीं जोड़ी है।
02क्षेत्र अनुसार
पंजाबी हिन्दू विवाह में कई दिन के कार्यक्रम होते हैं और संगीत-नृत्य इसकी पहचान है। (सिख आनंद कारज के लिए समुदाय पेज देखें।)
दुल्हन: लाल या गहरे रंग का लहंगा/सलवार-सूट, चूड़ा, कलीरे। दूल्हा: शेरवानी या अचकन, साफ़ा/पगड़ी, सेहरा, कलगी, पंजाबी जूती।
दुल्हन: पोशाक या लहंगा-ओढ़नी, बोरला (माथे का गोल आभूषण), रखड़ी, गोटा-पत्ती का काम। दूल्हा: अचकन/शेरवानी या बंदगला, लहरिया या बंधेज का साफ़ा, कटार/तलवार परंपरा के अनुसार।
दुल्हन: पानेतर (सफ़ेद/क्रीम साड़ी, लाल किनारी — मायके से) और घरचोला (लाल-हरी बंधनी, ज़री की चौकोर बुनाई — ससुराल से)। दूल्हा: शेरवानी, धोती या केडिया, साफ़ा।
दुल्हन: नऊवारी (नौ गज़) या पैठणी साड़ी, नथ, हरी चूड़ियाँ (हिरवा चुडा), मुंडावळ्या (माथे पर मोतियों की लड़ियाँ — दूल्हा-दुल्हन दोनों)। दूल्हा: कुर्ता-धोती या शेरवानी, फेटा।
दुल्हन: लाल बनारसी साड़ी, शोला का मुकुट, माथे पर चंदन के डिज़ाइन, शाखा-पोला (शंख और लाल मूँगे/लाख के कंगन) और लोहा। दूल्हा: धोती-पंजाबी, टोपोर (शोला की शंक्वाकार टोपी)।
तमिल विवाहों में समुदायों के बीच बहुत अंतर है; नीचे की रस्में विशेष रूप से ब्राह्मण और कई अन्य परिवारों में प्रचलित हैं।
दुल्हन: कांचीपुरम रेशम साड़ी (ब्राह्मण परिवारों में नौ गज़ की 'मडिसार' शैली), मंदिर आभूषण, गजरा। दूल्हा: वेष्टि (धोती) और अंगवस्त्रम्।
दुल्हन: मुहूर्त के लिए अक्सर लाल किनारी वाली सफ़ेद/क्रीम साड़ी, फिर रेशम साड़ी (जैसे धर्मावरम, कांचीपुरम)। दूल्हा: पंचे (धोती) और कुर्ता/अंगवस्त्रम्।
केरल के हिन्दू विवाह आमतौर पर छोटे और सादे होते हैं — मुख्य विधि कुछ ही मिनटों में पूरी हो सकती है। बहुत-से विवाह मंदिर परिसर में होते हैं; गुरुवायूर मंदिर विवाहों के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है।
दुल्हन: कसवु (ऑफ़-व्हाइट, सुनहरी किनारी) साड़ी या सेट-मुंडु, कासु माला (सिक्कों का हार), पालक्का माला, नागपडम। दूल्हा: कसवु मुंडु और शर्ट/जुब्बा।
दुल्हन: पीली या लाल साड़ी (कई परिवारों में पियरी — पीली साड़ी)। दूल्हा: धोती-कुर्ता या शेरवानी; मिथिला में 'पाग' (पारंपरिक टोपी)।
दुल्हन: फेरन/साड़ी, तरंग (सिर का पारंपरिक वस्त्र), देजिहोर (कानों से धागे में लटकता सोने का आभूषण — विवाहित होने का चिह्न)।
दुल्हन: मूगा या पाट रेशम की मेखेला-चादर (असम का मूगा रेशम भौगोलिक संकेतक — GI — से पंजीकृत है)। दूल्हा: धोती-कुर्ता और गमोसा/चेलेंग।
03मिश्रित विवाह
दोनों परिवार अपनी 'ज़रूरी' और 'वैकल्पिक' रस्मों की सूची बनाएं। अक्सर हर पक्ष की 2–3 ज़रूरी रस्में होती हैं जिन्हें एक ही कार्यक्रम में जोड़ा जा सकता है।
कई परिवार एक दिन एक परंपरा और अगले दिन दूसरी परंपरा से विधि करते हैं; कुछ एक ही मंडप में दोनों पुरोहितों के साथ संयुक्त विधि रखते हैं।
अलग धर्मों के बीच विवाह के लिए विशेष विवाह अधिनियम, 1954 के तहत पंजीकरण का रास्ता है। विवरण समुदाय पेज और NRI गाइड में देखें।
क्षेत्रीय रस्मों के लिए अलग सामग्री, वस्त्र और समय चाहिए — चेकलिस्ट से हर चीज़ पहले से तय करें।